अविनाश बाबू आपको अभी भी शर्म नहीं आती?
आज फ़िर से शर्मसार करते हुये अविनाश नें एक व्यक्तिगत पत्र को फ़िर से सार्वजनिक कर दिया है जो निंदनीय है और शायद अविनाश बाबू की रगों में बहते नापाक इरादों का फ़ल , क्योंकि इन्होने एक सीधे-साधे इंसान का सार्वजनिक रूप से अपमान किया है.श्री सुरेश चंद्र गुप्...
[पूरी पोस्ट]
कमलेश मदान
7
0
0
0
0
[14 Oct 2008 10:11 AM]



Shuffle








