निष्ठुर छल गया जीवन

safar ke sajde mein एक मित्र के पिता के दुनिया से चले जाने के बाद , मित्र की माँ जब जब मुझे मिलीं रोईं जरुर , जैसे अतीत के गले लग आईं हों | क्या हमने कभी बुढापे की आँख से जिन्दगी को देखा है ? जीवन के उत्तरार्ध को जाता हुआ जीवन साथी भी साथ छोड़ गए निष्ठुर छल गया जीवन काँप... [पूरी पोस्ट]
writer शारदा अरोरा
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[03 Sep 2009 02:41 AM]

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