तुम एक ख़्वाब लगते हो...

Firdaus's Diary कभी मैं सोचती ज़ुल्फ़ों की घनी, महकी, नरम छांव में तुम्हें बिठाकर वो सभी जज़्बात से सराबोर अल्फाज़ जो मैंने बरसों से अपने दिल की गहराइयों में छुपाकर रखे तुम्हारे सामने बिखेर दूं और तुम मेरे जज़्बात, मेरे अहसासात पढ़ लो लेकिन मेरा ज़हन मेरा साथ नहीं देता क्... [पूरी पोस्ट]
writer फ़िरदौस ख़ान
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[05 Nov 2008 05:24 AM]

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