ऐ चांद ! मेरे महबूब से फ़क़्त इतना कहना...

Firdaus's Diary ऐ चांद ! मेरे महबूब से फ़क़्त इतना कहना... अब नहीं उठते हाथ दुआ के लिए तुम्हें पाने की ख़ातिर... हमने दिल की वीरानियों में दफ़न कर दिया उन सभी जज़्बात को जो मचलते थे तुम्हें पाने के लिए... तुम्हें बेपनाह चाहने की अपनी हर ख़्वाहिश को फ़ना कर डाला... अब नही... [पूरी पोस्ट]
writer फ़िरदौस ख़ान
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[25 Sep 2009 04:19 AM]

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