सियासत का मजहब और मजहब की सियासत (Politics, secularism and religion)

DHAI AKHAR ढाई आखर सियासत को मजहब बड़ा भाता है और मज़हब को सियासत। सब अपनी सत्‍ता कायम करना चाहते हैं लेकिन भारत के संविधान की मजबूरी है। वह मजहब और सियासत के घालमेल के खि़लाफ़ है। कल का हंगामा ही लें। मामला उस अमरनाथ यात्रा से जुड़ा था, जो हिन्‍दुस्‍... [पूरी पोस्ट]
writer Nasiruddin
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[04 Jul 2008 06:14 AM]

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