दोस्त, साँस की डोर क़ायम है
हम ढेर सारे मिथकों और भ्रांतियों पर यक़ीन करते हैं और उसी में जीते हैं। समाज के बारे में, समुदायों और जातियों के बारे में... हम उसे सच की कसौटी पर कसना भी नहीं चाहते। वही भ्रांति और मिथक समुदायों और जातियों के बीच दूरी की वजह भी बनता है। मेरे...
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Nasiruddin
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[17 Jul 2008 02:08 AM]



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