माँ

गीतकार की कलम चाहता था लिखूँ शब्द माँ के लिये लेखनी एक भी किन्तु पा न सकी जितनी ममता उमड़ गोद में है गिरी सिन्धु से व्योम तक वह समा न सकी ज़िन्दगी, ज्ञान, उपलब्धियाँ, प्राप्ति सब एक वह ही रही सबका आधार है सरगमों ने समर्पण उसे कर दिया रागिनी कोई भी गुनगुना न सकी शब्द... [पूरी पोस्ट]
writer राकेश खंडेलवाल
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[10 May 2009 01:29 AM]

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