फिर नाम कैसे ले
रिश्ता कातिल से रहनुमा का। जैसे आजाब दोस्त की दुवा का॥ उम्र भर अब दर्दे-जुदाई सहना है। मिला है ये शिला मुझे वफ़ा का॥ इंसानियत से देखो तुम इन्सा को। मिल जायेगा रास्ता तुम्हे खुदा का॥ बच्चो मे तलाश कर उसे पा भी लो । देरो-हरम से नहीं वास्ता देवता का ॥ ख्...
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gargi gupta
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[01 Sep 2009 02:42 AM]



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