ग़ज़ल - जितने तेरी यादों के बादल छाए
जितने तेरी यादों के बादल छाए उतने मेरी आंखों में आँसू आए मन सागर की बंद सीपियाँ खोलीं जब आंखों से झर-झर झरते मोती पाए नींद खुली तो पंछी बनकर फुर्र हुए आंखों ने कुछ ऐसे सपने दिखलाए सिर्फ़ अना ही मेरी , मेरे साथ रही लालच के सब सौदे मैंने ठुकराए जिनको स...
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kavideepakgupta
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[25 Mar 2009 07:26 AM]



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