नए शेर
मेरी ज़िन्दगी ने ये साजिश रची है न सपना है कोई न ख्वाहिश बची है पता है फकत चार दिन का है जीवन सभी को मगर हाय- तौबा मची है ये शोहरत अजब शै है "दीपक" समझ लो मुकद्दर है उसका ये जिसको पची है कवि दीपक गुप्ता 9811153282 , 9311153282 www. kavideepakgupta.co...
[पूरी पोस्ट]
kavideepakgupta
10
0
0
0
0
[17 Jun 2009 13:54 PM]



Shuffle








