ग़ज़ल - ज़माने में बिना मतलब के मतलब कौन रखता है
ज़माने में बिना मतलब के मतलब कौन रखता है किसी के ज़ख्म पे मरहम भला अब कौन रखता है वो इक विश्वास ही तो है उसे मानो न मानो फ़लक पर ये उजाला और ये शब् कौन रखता है ये मेरी ज़िन्दगी के रास्तों पे उलझनें हर पल मैं तुझसे पूछता हूँ तू बता रब, कौन रखता है मेरा...
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kavideepakgupta
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[09 Aug 2009 06:35 AM]



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