ग़ज़ल - ज़माने में बिना मतलब के मतलब कौन रखता है

kavideepakgupta ज़माने में बिना मतलब के मतलब कौन रखता है किसी के ज़ख्म पे मरहम भला अब कौन रखता है वो इक विश्वास ही तो है उसे मानो न मानो फ़लक पर ये उजाला और ये शब् कौन रखता है ये मेरी ज़िन्दगी के रास्तों पे उलझनें हर पल मैं तुझसे पूछता हूँ तू बता रब, कौन रखता है मेरा... [पूरी पोस्ट]
writer kavideepakgupta
views
10
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[09 Aug 2009 06:35 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix