ग़ज़ल - बनाकर अपनी दुनिया को उसे बर्दाश्त भी करना

kavideepakgupta बनाकर अपनी दुनिया को उसे बर्दाश्त भी करना खुदा मेरे, मैं तेरे हौसले की दाद देता हूँ परिंदे ने कहा तू कैद रख या कर रिहा मुझको मैं अपनी ज़िन्दगी का हक़ तुझे, सैय्याद देता हूँ मैं दुःख से घिर गया तो गैब से आवाज ये आयी सुखों की छावं मैं अक्सर दुखों के बा... [पूरी पोस्ट]
writer kavideepakgupta
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[09 Aug 2009 06:38 AM]

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