अच्छा देखो गुस्सा न करो
हम जानते हैं की हम उपस्थिति के बारे में थोड़ा गड़बडकर रहे हैं पर कसम कल्लन की जवानी की माशूका की हम अपने से इसके जिम्मेदार नहीं हैं। इधर तबियत है की न पूरी तीख है न पूरी ख़राब। रात रात दर्द से जागते कोल्हू के बैल की तरह एक दरवाज़े से निकल कर दूसरे से घ...
[पूरी पोस्ट]
rajkumar jha
12
0
0
0
0
[06 Sep 2009 00:51 AM]



Shuffle








