करे कोई भरूँ मैं...ऐसा क्यों है

विनय पत्रिका कल क्या होगा पिछले तीन महीने से फोन पर मुझे सृजित कह कर गालियाँ दी जा रही हैं। बैंक का कोई रिकवरी एजेंट मेरे घर के नंबर पर फोन करता है और मुझसे कहता है कि मैं सृजित हूँ और मुझ पर उसके बैंक का बकाया है। वह रिकवरी एजेंट मुझसे कहता है कि मैं बैंक के क्र... [पूरी पोस्ट]
writer बोधिसत्व
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[16 Jun 2009 15:29 PM]

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