आचार्य रामनाथ सुमन

निनाद गाथा नश्वर है यह देह अनश्वर अपने आत्माराम हैं, जिनकी इच्छा बिना न जग में पूरे होते काम हैं, हमको प्रभु नें भेजा देखो हमनें जीवन खूब जिया, अच्छा पहना अच्छा गहना अच्छा खाया और पिया, हम जग में रोते आये थे हंसते अपनी कटी उमर, हमने राह गही जो अपनी वह औरों को ब... [पूरी पोस्ट]
writer अभिनव
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[12 Jul 2009 01:55 AM]

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