स्मृति शेष - कलम के सिपाही - सिएटल - रविवार १९ जुलाई २००९

निनाद गाथा भारतीय साहित्य जगत को पिछले कुछ महीनों में जो आघात पहुंचे हैं वे बड़े गहरे हैं. साहित्य ऋषि विष्णु प्रभाकर के देहवसान के एक सप्ताह के भीतर संस्कृत के परम विद्वान आचार्य रामनाथ सुमन के जाने का समाचार आया. अभी साहित्य संसार प्रातः स्मरणीय सायं वन्दनीय... [पूरी पोस्ट]
writer अभिनव
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[15 Jul 2009 02:21 AM]

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