त्योहारों का मौसम
लो आगया फिर से त्योहारों का मौसम उनके लूटने का हमारे लुट जाने का मौसम बाजारों में रौशनी चकाचौंध करने लगी है अकिंचनो की पीड़ा फिर बढ़ने लगी है धनी का उत्साह और निर्धन की आह सभी ढ़ूँढ़ रहे हैं खुशियों की राह व्यापारी की आँखों में हज़ारों सपने हैं ग्राहक...
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शोभा
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[20 Oct 2008 06:57 AM]



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