anubhav

anubhav बीत रहा है जीवन पल-पल काल चक्र है घूम रहा आता है जीवन में कोई कोई पीछे छूट रहा सूखी पुष्पों की माला जो विगत वर्ष का हार बनी नए वर्ष के स्वागत में फिर मुसकाती है कली-कली फिर आँखों में नूतन सपने जीवन सुखी बनाने के भूल विगत की असफलताएँ भावी सफल बनाने के... [पूरी पोस्ट]
writer शोभा
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[17 Jan 2009 06:10 AM]

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