मेरी नाज़नीं तुम मुझे भूल जाना

निंदा पुराण स्वर: अहमद हुसैन और मोहम्मद हुसैन मेरी नाज़नीं तुम मुझे भूल जाना, मुझे तुमसे मिलने न देगा ज़माना। कभी हम मिले थे किसी एक शहर में, कभी हम मिले थे गुलों की डगर में। समझना कि था ख़्वाब कोई सुहाना, मेरी नाज़नीं तुम मुझे भूल जाना। जुदाई के सदमों को हँस हँस के... [पूरी पोस्ट]
writer अंकुर वर्मा

अवर्गीकृत

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[19 Dec 2008 11:12 AM]

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