विराम-चिह्न के आत्म कहानी, सुनीं उनहीं की जुबानी

भोजपुर नगरिया हम विराम-चिह्न हईं। कुछ ग्यानी लोग हमके विराम चिन्ह चाहें विराम भी बोलेला पर हमरा कवनो दुख नइखे उलटे खुसी बा। हाँ , एगो बाति हम बता दीं ; हमार कोसिस रहेला की लिखित वाक्यन आदि में हम कवनो न कवनो तरह से हाजिर रहीं। हम अपनी मुँहें मियाँ मिट्ठू नइखीं बनत... [पूरी पोस्ट]
writer प्रभाकर पाण्डेय
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[30 Jun 2009 05:39 AM]

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