मजा लीजिए भाई उडनतस्तरी की इस गजल का...

आपका पन्‍ना रात भर दबा के पी, खुल्लम खुल्ला बार में, सारा दिन गुजार दिया बस उसी खुमार में, गम गलत हुआ जरा तो इश्क जागने लगा, रोज धोखे खा रहे हैं जबकि हम तो प्यार में, कैश जितना जेब में था, वो तो देकर आ गये, बाकी जितनी पी गये, वो लिख गई उधार में, यों चढ़ा नशा कि... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल पाण्डेय
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[08 Nov 2008 00:21 AM]

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