कुछ ज्ञात कुछ अज्ञात

कुछ ज्ञात कुछ अज्ञात दोहे" अपनी-अपनी सोच है, अपने-अपने मूल्य, पाप-पुण्य कुछ भी नहीं, अंत में सब कुछ शून्य ! अपना-अपना भाग है, अपने-अपने करम, धर्म के ठेकेदार भी, करते देखे अधर्म ! करके पूजा-पाठ ही, जीवन दें बिताये, ईश्वर की इसी सृष्टि को, दे मान नहीं पाये ! अपने-अपने स्वा... [पूरी पोस्ट]
writer ©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
views
7
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[09 Jun 2009 11:31 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix