गोली-बन्दूक थोडे बुझैत छैक

कतेक रास बात करण समस्तीपुरी "छौंरी पतरकी गे........ गोरिया खेतबा के आरी.... काहे मारे गजब पिहकारी.... !!" गोर दक-दक भरल-पुरल शरीर, माथ पर जटा, हाथ मे डिबिया लेने आ तोतर आवाज मे इएह गीत के तान छोडैत घर से बथान पर जाएत जटा झा के प्रति पता नहि कोना हमरा मोन मे लगाव... [पूरी पोस्ट]
writer सम्पादक: कतेक रास बात
views
7
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[16 Jun 2009 00:44 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix