गोली-बन्दूक थोडे बुझैत छैक
करण समस्तीपुरी "छौंरी पतरकी गे........ गोरिया खेतबा के आरी.... काहे मारे गजब पिहकारी.... !!" गोर दक-दक भरल-पुरल शरीर, माथ पर जटा, हाथ मे डिबिया लेने आ तोतर आवाज मे इएह गीत के तान छोडैत घर से बथान पर जाएत जटा झा के प्रति पता नहि कोना हमरा मोन मे लगाव...
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सम्पादक: कतेक रास बात
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[16 Jun 2009 00:44 AM]



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