फ़्रेंडशिप डे-मित्र हो तो ऐसा
दोस्त ऐसा जिसे कहो कुछ नहीं समझ जाए लिखो कुछ नहीं पढ़ ले आवाज़ दो उसके पहले सुन ले मुझे गुण-दोष सहित स्वीकार करे ग़र चोट लगे उसे दर्द हो मुझे कमाल मैं करूँ गर्व हो उसे अवसाद से उबार दे स्नेह दे , सत्कार दे आलोचना का अधिकार दे रिश्तों को विस्तार दे दु:ख...
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sanjay patel
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[02 Aug 2008 15:25 PM]



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