श्रोता की खसलत कार्यक्रम का सत्यानाश कर देती है !
बात थोड़ी लम्बी कह गया हूँ ; यदि दस से पन्द्रह मिनट का समय दे सकते हैं तो ही इसे पढ़ें.हाँ इस पोस्ट में व्यक्त किये गए दर्द को समझने के लिये एक संगीतप्रेमी का दिल होना ख़ास क्वॉलिफ़िकेशन है. बीते तीस बरसों से तो मंच पर बतौर एक एंकर पर्सन काम कर ही रहा हू...
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sanjay patel
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[08 Oct 2008 14:08 PM]



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