विवाह समारोहों में ख़त्म हो रही आत्मीयता,बढ़ता जा रहा भौंडापन !
इन दिनों विवाह समारोहों की धूम रही. एक विचित्र बात इन समारोहों में ये देखने में आई कि सर्वत्र आर्थिक मंदी का ढोल बज रहा है लेकिन ब्याह-शादियों के ये प्रसंग इसका अपवाद ही कहे जाने चाहियें.बेतहाशा पैसा ख़र्च होता है इनमें.डेकोरेशन हो,संगीत हो या व्यंजन...
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sanjay patel
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[27 Nov 2008 07:28 AM]



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