अमलतास के झूमर:

सहज साहित्य(SAHAJ SAHITYA) ।रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ धरती तपती लोहे जैसी गरम थपेड़े लू भी मारे। अमलतास तुम किसके बल पर खिल -खिल करते बॉंह पसारे। पीले फूलों के गजरे तुम भरी दुपहरी में लटकाए। चुप हैं राहें सन्नाटा है फिर भी तुम हो आस लगाए। जीवन एक कला है । साहित्य उसी का सहज म... [पूरी पोस्ट]
writer सहज साहित्य

कविताएँ

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[13 Aug 2009 08:18 AM]

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