जीवन की कर्मभूमि

सहज साहित्य(SAHAJ SAHITYA) जीवन की कर्मभूमि रामेश्वर काम्बोज ' हिमांशु ' जीवन की इस कर्मभूमि में , ठीक नहीं है बैठे रहना । बहुत ज़रूरी है जीवन में सबकी सुनना ,अपनी कहना । सुख जो पाए, हम मुस्काए, आँसू आए ,उनको सहना । रुककर पानी सड़ जाता है, नदी सरीखे निशदिन बहना [21जून,2009 ] जीव... [पूरी पोस्ट]
writer सहज साहित्य

जीवन –दर्शन

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[13 Aug 2009 08:07 AM]

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