मैं उजाला हूँ
मैं उजाला हूँ -रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' मैं उजाला हूँ ,उजाला ही रहूँगा । अँधेरी गलियों में ज्योति-सा बहूँगा । चाँद मुझे गह लेंगे कुछ पल के लिए , पर मैं रोशनी की कहानी कहूँगा ॥ XXXXXX पल जो भी मिले हैं मुझे उपहार में । उनको लुटा दूँगा मैं सि...
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सहज साहित्य
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[13 Aug 2009 08:07 AM]



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