आखिरकार बहस शुरु तो हुई

आवारा बंजारा पहल चाहे देर हो या सबेर हो, पहल ही होती है। एक लंबे अरसे से कम से कम छत्तीसगढ़ में तो इस बहस के शुरु होने की प्रतीक्षा की जा रही थी कि मानवाधिकार कार्यकर्ता व संगठन नक्सली हिंसा होने पर तो खामोशी ओढ़े रहते हैं लेकिन जहां सरकार के या उसके पुर्जों के ह... [पूरी पोस्ट]
writer Sanjeet Tripathi

छत्तीसगढ़- "आज"

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[09 May 2009 02:32 AM]

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