भोपाल टू जयपुर वाया मुंबई
अक्सर मैं सोचता हूं कि कुछ वक्त निकाल कर कुछ न कुछ लिखा जाए अखबार के अलावा। कई दिनों बाद आज मौका मिल ही गया है। आज पुरानी कहानी को फिर से नए अंदाज में लिखने को दिल कह रहा है। कुछ इस कहानी से बुरी तरह पक जाएंगे तो कुछ कहेंगे आषीष भाई बहुत हुआ। अब तो ब...
[पूरी पोस्ट]
आशीष
8
0
0
0
0
[12 Nov 2008 11:58 AM]



Shuffle








