धमाकों में सहमी

कुमार आशीष जहां लोगों के दिल मुहब्‍बत से खाली जहां दुनिया रहमोकरम की सवाली जहां पैसे वाले गरीबों को देते भर कर पटाखों में कस करके गाली दिवाली ये वो पहले वाली नहीं है धमाकों में सहमी हुई है दिवाली ये झूठी दिवाली ये झूठी दिवाली... [पूरी पोस्ट]
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[10 Nov 2007 02:54 AM]

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