तनिक ठहर कर
अपनापन जैसा जो हममें है उसको आंखों से देखें आओ देखें हम जो नहीं हों तो आखिर फिर बचता क्या है हम जिसको कहते हैं जीवन मौत कि जिससे घबराते हैं अन्तर्मन की ज्योति जलाकर देखें आखिर पर्दा क्या है नचा रहा है हमें मदारी जो बंदर जैसा दुनिया में आओ तनिक ठह...
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[10 Mar 2008 10:58 AM]



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