करम के लेख

कुमार आशीष एक आंख कुछ और देखती है दूजी कुछ देखे एक करम के लेख बांचती दूजी पल-पल जोखे पल-पल धोखे खेल तमाशे भीड़भाड़ दुनिया की बढ़ते जाओ भी बस आगे खुद को रोके-रोके... [पूरी पोस्ट]
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[20 Apr 2008 10:53 AM]

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