निशांदेही

कुमार आशीष तेरी आंखें शिकारियों सी सधी मेरे मन के पटल पे तैर गयीं नींद चिंहुकी तो, पाया जैसे इन्‍हें मुद्दतों से तलाश मेरी थी कितने जन्‍मों की प्‍यास थी कि जिसे सातवें आसमान की थी खबर रूह के साथ जिसकी जद्दोजहद रूह के आरपार तैरी थी और फिर सिर्फ जिसके ही खातिर बू... [पूरी पोस्ट]
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[18 Oct 2008 10:17 AM]

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