दीप

कुमार आशीष हुआ कभी जो उसको हमको फिर दुहराना है.. तिरा शिलायें जल पर सागर पार कराना है.. दीवाली पर हमने जो ये दीप सजाये हैं, बाती से लौ का रिश्‍ता वो बहुत पुराना है...... [पूरी पोस्ट]
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[27 Oct 2008 04:47 AM]

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