देश के दुश्मन

राही मासूम रज़ा का साहित्य देश के दुश्मन के मुख्बिर पर इस धरती की लानत अपने देश की नर्म हवा पानी मिट्टी को लानत इस मिट्टी से बनने वाले नर-नारी की लानत लानत उस पर भाई-बहन की लानत रक्षाबन्धन की सुनो भाइयो, सुनो भाइयो, कथा सुनो सत्तावन की... [पूरी पोस्ट]
writer डा. फीरोज़ अहमद
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[08 Mar 2009 03:51 AM]

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