दिल ही दिल

राही मासूम रज़ा का साहित्य पटना के अत्राफ (पटना की दिशा में) में फैला छुट पुट यों जो उजाला दिल ही दिल में घबराया तब अंग्रेजों का अंधेरा अंग्रेजों ने सर जोड़े और जोड़ के सर यह सोचा जासूसों को चार तरफ जल्दी जल्दी दौड़ाया यह है धरती राम की लेकिन कौन कमी है रावन की सुनो भाइयो, सुनो भ... [पूरी पोस्ट]
writer डा. फीरोज़ अहमद
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[11 Mar 2009 03:56 AM]

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