क्रांति कथा
क्रांति कथा सुनो भाइयो, सुनो भाइयो, कथा सुनो सत्तावन की कान खोलकर सुना कथा है क्रांति के पहले सावन की सबने चलाया, धीरे-धीरे फौज पे अपना जादू आजादी की नई कली चटकी तो फैली खुशबू हिन्दी फौज में नफरत की एक आँधी आई हरसू (चारों ओर) जिसको पानी समझ रहे थे वह...
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डा. फीरोज़ अहमद
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[22 Mar 2009 15:25 PM]



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