राही मासूम रजा की कहानियां: मनुष्य के ख्वाबों की तावीर
प्रताप दीक्षित राही मासूम रजा के निधन के १६ वर्षों बाद उनकी याद और उनके साहित्य का पुनर्मूल्यांकन इसलिए और महत्त्वपूर्ण हो जाता है कि आजादी के ६० साल बाद भी वे दारूण स्थितियां, जिनके विरुद्ध राही ने कलम उठाई थी ज्यों की त्यों मौजूद हैं। आजादी का वास्...
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डा. फीरोज़ अहमद
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[05 Apr 2009 06:22 AM]



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