साथ रहा न जाय, दूरी सही न जाय
लोकतंत्र का ऐसा ड्रामा शायद ही भारत ने कभी इससे पहले देखा हो। दुनिया के सबसे बड़े धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र ने इससे ज्यादा शर्मनिरपेक्ष चुनाव इससे पहले नहीं देखा होगा। त्रिशंकु संसद का ऐसा अंदेशा और ऊपर से कुर्सी का ऐसा मोह की आखिरी चरण का चुनाव नजदीक आ...
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Satyendra Prasad Srivastava
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[11 May 2009 12:53 PM]



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