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नारी का कविता ब्लॉग अपना घर होगा,अपनी इच्छा ,अपने ख्यालों सेउसे एक अनोखा रंग दूंगी........ख्वाहिशों की टोकरी मेंयह भी एक ख्वाहिश रही नारी की,पर घर?वह अपना होता कहाँ है !पनाह मिलती है,खाने को दो रोटीऔर एक नाम.........बहुत कम लोगों की पोटली के ख्वाहिशसच होते हैंवरना जिधर... [पूरी पोस्ट]
writer रश्मि प्रभा...
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[29 Jul 2009 06:08 AM]

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