तुम्हारी गलियों में घूमते-घूमते
तुम्हारी गलियों में घूमते-घूमते बहुत कुछ याद आता है। वो कौफ़ी का पहला प्याला, तुम्हारे हाथ का पहला निवाला, तुम्हारी मासूम सी हँसी की गहराई, और तुम्हारे मुहल्ले वाले सूरज की परछाई, और वो हर छोटी चीज, जिससे तुम्हारा नाता है। तुम्हारी गलियों में घूमते-घू...
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विकास कुमार
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[10 May 2009 15:39 PM]



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