तुम्हारी गलियों में घूमते-घूमते

I'm Vikash & this is my world...! तुम्हारी गलियों में घूमते-घूमते बहुत कुछ याद आता है। वो कौफ़ी का पहला प्याला, तुम्हारे हाथ का पहला निवाला, तुम्हारी मासूम सी हँसी की गहराई, और तुम्हारे मुहल्ले वाले सूरज की परछाई, और वो हर छोटी चीज, जिससे तुम्हारा नाता है। तुम्हारी गलियों में घूमते-घू... [पूरी पोस्ट]
writer विकास कुमार

मेरी कविताएँ

views
7
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[10 May 2009 15:39 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix