प्रेम ज्ञान है!

ओशो चिन्‍तन मेरा संदेश छोटा-सा है- ''प्रेम करो। सबको प्रेम करो। और ध्यान रहे कि इससे बड़ा कोई भी संदेश न है, न हो सकता है।'' मैंने सुना है : एक संध्या किसी नगर से एक अर्थी निकलती थी। बहुत लोग उस अर्थी के साथ थे। और, कोई राजा नहीं, बस एक भिखारी मर गया था। जिसके प... [पूरी पोस्ट]
writer राजेंद्र त्‍यागी

पथ के प्रदीपधर्म-अध्यत्म

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[09 Sep 2008 19:30 PM]

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