सूर्य पर ध्यान दो!

ओशो चिन्‍तन मनुष्य शुभ है या अशुभ?'' मैंने कहा स्वरूपत: शुभ। और, इस आशा व अपेक्षा को सबल होने दो। क्योंकि जीवन उ‌र्ध्वगमन के लिए इससे अधिक महत्वपूर्ण और कुछ नहीं है।'' एक राजा की कथा है, जिसने कि अपने तीन दरबारियों को एक ही अपराध के लिए तीन प्रकार की सजाएं दी थी... [पूरी पोस्ट]
writer राजेंद्र त्‍यागी

पथ के प्रदीपधर्म-अध्यत्म

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[10 Sep 2008 19:30 PM]

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