अभय समाधि है!

ओशो चिन्‍तन धर्म में जो भय से प्रवेश करते हैं, वे भ्रम में ही रहते हैं कि उनका धर्म में प्रवेश हुआ है। भय और धर्म का विरोध है। अभय के अतिरिक्त धर्म का और कोई द्वार नहीं है। कोई पूछता था : ''आप कहते हैं कि प्रभु भीतर है। पर मुझे तो कोई भी दिखाई नहीं पड़ता!'' उससे... [पूरी पोस्ट]
writer राजेंद्र त्‍यागी

पथ के प्रदीपधर्म-अध्यत्म

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[11 Sep 2008 19:30 PM]

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