परम निधि की खोज!

ओशो चिन्‍तन आदर्श को चुनने में कभी कंजूसी मत करना। वह तो ऊंचे से ऊंचा होना चाहिए। वस्तुत: तो परमात्मा से नीचे जो है, वह आदर्श ही नहीं है। आदर्श उसकी भविष्यवाणी है, जो कि अंतत: तुम करके दिखा दोगे। वह तुम्हारे स्वरूप की परम अभिव्यक्ति की घोषणा है। सुबह से सांझ तक... [पूरी पोस्ट]
writer राजेंद्र त्‍यागी

पथ के प्रदीपधर्म-अध्यत्म

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[12 Sep 2008 19:30 PM]

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