पाप-पुण्य!

ओशो चिन्‍तन कुछ युवकों ने मुझ से पूछा : ''पाप क्या है?'' मैंने कहा, ''मूर्च्‍छा'' वस्तुत: होश पूर्वक कोई भी पाप करना असंभव है। इसलिए, मैं कहता हूं कि जो परिपूर्ण होश में हो सके, वही पुण्य है। और जो मूच्र्छा, बेहोशी के बिना न हो सके वही पाप है। एक अंधकार पूर्ण रा... [पूरी पोस्ट]
writer राजेंद्र त्‍यागी

पथ के प्रदीपधर्म-अध्यत्म

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[16 Sep 2008 19:30 PM]

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