मुझे कुछ नहीं चाहिए!
परमात्मा के अतिरिक्त और कोई संतुष्टिं नहीं। उसके सिवाय और कुछ भी मनुष्य के हृदय को भरने में असमर्थ है। एक राजमहल के द्वार पर बड़ी भीड़ लगी थी। किसी फकीर ने सम्राट से भिक्षा मांगी थी। सम्राट ने उससे कहा, ''जो भी चाहते हो, मांग लो।'' दिवस के प्रथम याचक...
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राजेंद्र त्यागी
पथ के प्रदीपधर्म-अध्यत्म
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[17 Sep 2008 19:30 PM]



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