हँसी में रुदन...रुदन में हँसी !

डॉ. चन्द्रकुमार जैन हँसी में रुदन के आँसू मुझे दिखने लगे हैं रुदन के आँसुओं पर अब हँसी आने लगी है बनें सौ बार रोने के भले हालात तो क्या हजारों सबब हैं बरबस ख़ुशी छाने लगी है। ===========================... [पूरी पोस्ट]
writer Dr. Chandra Kumar Jain
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[02 Sep 2009 00:11 AM]

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